IAS Success Story: बचपन में चराई बकरियां, गरीबी की वजह से नहीं जा पाए कॉलेज; फिर भी बिना कोचिंग के UPSC पास कर बने IFS

IAS Success Story: बचपन में चराई बकरियां, गरीबी की वजह से नहीं जा पाए कॉलेज; फिर भी बिना कोचिंग के UPSC पास कर बने IFS

Who is IFS Officer Amararam Gurjar: देश में हर साल लाखों युवा ऊंचे सपने लेकर UPSC की परीक्षा में शामिल होते हैं. उनमें से कुछ युवा सफल होते हैं, जबकि काफी नौजवान सफलता न मिलने से निराश होकर प्रयास छोड़ देते हैं. आज हम आपको ऐसे एक IFS की कहानी बताते हैं, जिसने बचपन से बकरियां चराईं, कभी कॉलेज नहीं जा पाया. इसके बावजूद बिना कोचिंग के अपनी मेहनत से देश की सबसे कठिन परीक्षा पास करके सपनों को पूरा किया. 

इटली में तैनात हैं IFS अमराराम गुर्जर

इस अधिकारी का नाम अमराराम गुर्जर (IFS Amararam Gurjar) है. वे भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी हैं और फिलहाल इटली में डिप्‍टी एम्‍बेसडर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. उनका जीवन देश के उन लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल है, जो गरीबी या अन्य कारणों के चलते कोशिश करने से पहले ही हार मान लेते हैं. आज अमराराम गुर्जर की कहानी पढ़कर आपको भी काफी प्रेरणा मिलेगी. 

बचपन में पिता के साथ चराईं बकरियां

अमराराम गुर्जर (IFS Amararam Gurjar) मूल रूप से राजस्थान के पाली जिले के गुड़ा रामसिंह गांव के रहने वाले हैं. पिता घीसाराम गुर्जर और मां तीजा देवी साधारण किसान थे. अपने 8 बच्चों पालने के लिए वे गाय-बकरियां चराया करते थे. अमराराम ने 5वीं तक की पढ़ाई करीब 5 किमी दूर एक सरकारी स्कूल में पूरी की. उनके पास पहनने के लिए जूते-चप्पल तक नहीं थे. ऐसे में नंगे पैर रेतीले रास्ते से होकर उन्हें रोजाना 10 किमी का सफर तय करना पड़ता था. इसके बाद आगे की पढ़ाई उन्होंने 15 किमी दूर बगड़ी के एक स्कूल से पूरी की. छुट्टी के दिन वे पिता के साथ बकरियां चराने जाते थे.

बीच में छोड़नी पड़ी पढ़ाई

मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में अमराराम गुर्जर (IFS Amararam Gurjar) बताते हैं कि वे आगे पढ़ना चाहते थे लेकिन परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति की वजह से उन्हें 1994 में पढ़ाई छोड़नी पड़ गई. करीब 1 साल घर बैठने के बाद उन्होंने फिर स्कूल जाना शुरू कर दिया. इसके बाद उन्होंने 74 फीसदी अंकों के साथ 12वीं की. इसी परीक्षा से 3 महीने पहले पिता की मौत हो गई, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. इसके बाद वर्ष 1998 में अमराराम गुर्जर ने टीचर्स ट्रेनिंग का कोर्स पूरा किया. 

राजस्थान पुलिस में बने सब-इंस्पेक्टर

वर्ष 2000 में उन्हें एक और झटका लगा, जब मां का आकस्मिक देहांत हो गया. इससे उन्हें दुख तो हुआ लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य की ओर पूरे फोकस के साथ जुटे रहे. उन्होंने 61 फीसदी अंकों के साथ ग्रेजुएशन पूरा किया. इसके बाद वर्ष 2003 में वे दिल्ली एमसीडी के स्कूल में टीचर के रूप में भर्ती हो गए और 2 साल तक संगम विहार के स्कूल में पढ़ाया. इसी दौरान उन्होंने राजस्थान पुलिस में भर्ती का फॉर्म भरा और वर्ष 2005 में दूसरी रैंक लाकर राजस्थान पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बन गए. 

बिना कोचिंग के पास की यूपीएससी

इसी दौरान उनका रेलवे में स्टेशन मास्टर और सीएसआईआर में भी चयन हो गया. सोच-विचार के बाद अमराराम गुर्जर (IFS Amararam Gurjar) ने सब-इंस्पेक्टर की नौकरी जॉइन करने का फैसला किया. दरोगा के रूप मे वे जयपुर के कई थानों तैनात रहे. हालांकि यह उनका अंतिम लक्ष्य नहीं था. अब वे यूपीएससी की तैयारी में जुटे थे. वर्ष 2006 में अपने पहले ही प्रयास में वे इंटरव्‍यू तक पहुंचे लेकिन सफल नहीं हो पाए. इस नाकामी से आहत होने के बजाय उन्होंने दोबारा जोरदार तैयारी और 2007 में दूसरे प्रयास में पूरे भारत में 140वीं रैंक पाकर IFS अधिकारी बन गए. 

अब तक कई देशों में रह चुके हैं तैनात

अपने 16 साल के करियर में वे अब तक कई देशों में सेवाएं दे चुके हैं. इनमें मिस्र, ओमान, पुर्तगाल और अब इटली शामिल हैं. उनकी पत्नी का नाम कमला देवी है. उनके 2 बेटे और एक बेटी है. बेटा दिलीप और यशवंत नीदरलैंड में रहकर ग्रेजुएशन कर रहे हैं. जबकि बेटी पैंटालून मुम्‍बई में फैशन डिजाइनर है. अमराराम गुर्जर (IFS Amararam Gurjar) कहते हैं कि कभी सोचा नहीं था कि यहां तक पहुंचेंगे लेकिन इतना जरूर तय किया था कि जिंदगी में कुछ करके दिखाना है. ईश्वर ने भी इस साधना में उनका साथ दिया और वे अपने सपनों को पूरा कर पाए. 

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